Tuesday, 27 January 2026

मनुष्य

अगर मुझे मनुष्य होना सीखना हो

तो मैं तुम्हारे मौन से शुरू करूँगा

जहाँ करुणा

किसी दिखावे की मोहताज नहीं होती।


अगर मुझे कोई प्रश्न सताने लगे

तो उत्तर मैं किताबों में नहीं

तुम्हारी आँखों के ठहराव में खोजूँगा

जहाँ गहराइयों में जवाब तैरते हैं


अगर दुनिया मुझे अपराधी कहे

तो फैसला कानून नहीं

तुम्हारी दृष्टि सुनाए

और वही सजा मेरा इंसाफ होगा


अगर कोई सच मुझे सताएगा

तो मैं अपने डर को तुम्हारे हाथों में रख दूंगा

मुझे यकीन है 

तुम्हारे हाथ मुझे गिरने से बचाएंगे


हो सकता है मुझसे कहा जाए

उस अंधेरे में उतरने को

जहाँ से लौटना संभव नहीं

तब मैं तुम्हारे नाम को

एक पुल की तरह पुकारूँगा

मुझे यकीन है किनारा तुम ही बनोगी


और अगर किसी दूसरी दुनिया में

मुझसे मेरा हिसाब माँगा जाएगा

तो तुम मुस्कुरा कर कहना

यह रहा एक इंसान

जिसने प्रेम को

अपना आख़िरी तर्क बनाया।


अमित ‘मौन’


 #amitmaun #amit #maun #love #poem #poetry #hindi #hindipoem #hindipoems 

No comments:

Post a Comment

मनुष्य

अगर मुझे मनुष्य होना सीखना हो तो मैं तुम्हारे मौन से शुरू करूँगा जहाँ करुणा किसी दिखावे की मोहताज नहीं होती। अगर मुझे कोई प्रश्न सताने लगे त...