Saturday, 18 November 2017

बीत गया वो बचपन , beet gaya wo bachpan

घर के सब बच्चों के साथ पूरी मस्ती में जीते थे
मिलता था जब दूध हमे सब नाप नाप के पीते थे

स्कूल से वापस आते ही हम खेलने भाग जाते थे
खाना जब बन जाता तो भैया आवाज़ लगाते थे

पेंसिल अगर खो जाती तो बहुत पिटाई होती थी
चोट अगर लग जाये तो मुझसे ज्यादा मम्मी रोती थी

देर रात तक पापा के आने का करते थे इंतज़ार
कुछ चीज़ मिलेगी आने पर और मिलेगा थोड़ा प्यार

बीत गया वो बचपन अब नहीं रहा वो प्यार
अब मतलब की दुनिया मतलब के सब यार

No comments:

Post a Comment

सब लौट गए

तुम्हारी देह एक दीवार और काँधे खूँटी थे पहली बार आलिंगनबद्ध होते ही  मैं वहीं टंगा रह गया तुमने जुल्फों तले मुझे छुपाया तो लगा  उम्र भर की छ...