Monday, 18 February 2019

हो बात अगर बस ख्याति की

हो बात अगर बस ख्याति की
मैं  ख़ुद  ही  पीछे  हो  जाऊं
विख्यात बनो तुम अमर रहो
मैं इतिहास बनूँ और खो जाऊं

तुम बनो देवता मंथन में
मैं नाग वासुकी हो जाऊं
हो  अमृत  तेरे  हिस्से में
मैं कालकूट सा विष पाऊं

तुम  त्रेता  के  रावण  होना
मैं  कुम्भकर्ण  ही  हो जाऊं
तुम बड़े बनो और आज्ञा दो
मैं  प्राण  पखेरू  ले  आऊं

तुम द्वापर के अर्जुन होना
मैं  एकलव्य  ही  हो जाऊं
तुम बनो धनुर्धर इस युग के
हँस  के  अँगूठा  ले  आऊं
 
तुम राम रहो या कृष्ण बनो
मैं  शेषनाग  सा  हो  पाऊं
हो नाम तुम्हारा हर युग में
मैं साथ निभाने आ जाऊं

अमित 'मौन'

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