Sunday, 28 June 2020

सीख

एक शिक्षक हमें पढ़ना सिखा सकता है पर हमें क्या पढ़ना है वो हमें स्वयं तय करना है। हम सीखना चाहें तो हर पल हमको कुछ सिखाता है और ना चाहें तो किताबें भी निर्जीव वस्तु हैं।

क्योंकि इंसान को सबसे ज्यादा बुद्धिमान जीव माना गया है इसीलिए इंसान की हर दशा एक सीख देकर जाती है।

पाबंदियों के बावजूद कहीं भी पहुँचा जा सकता है, ये बात हमारा मन सिखाता है।

बढ़ना चाहो तो कोई रोक नही सकता ये हमे आँसुओं ने सिखाया।

हँसते हुए हम ये सीखते हैं कि दुनिया में बहुत कुछ अच्छा भी है।

चोट का ठीक होना ये सिखाता है कि हर दर्द का अंत निश्चित है और धूप का छाँव में बदलना तय है।

इस दुनिया में सब कुछ मुमकिन है ये हम सपनों से सीख सकते हैं।

अमित 'मौन'

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