Tuesday, 27 January 2026

मनुष्य

अगर मुझे मनुष्य होना सीखना हो

तो मैं तुम्हारे मौन से शुरू करूँगा

जहाँ करुणा

किसी दिखावे की मोहताज नहीं होती।


अगर मुझे कोई प्रश्न सताने लगे

तो उत्तर मैं किताबों में नहीं

तुम्हारी आँखों के ठहराव में खोजूँगा

जहाँ गहराइयों में जवाब तैरते हैं


अगर दुनिया मुझे अपराधी कहे

तो फैसला कानून नहीं

तुम्हारी दृष्टि सुनाए

और वही सजा मेरा इंसाफ होगा


अगर कोई सच मुझे सताएगा

तो मैं अपने डर को तुम्हारे हाथों में रख दूंगा

मुझे यकीन है 

तुम्हारे हाथ मुझे गिरने से बचाएंगे


हो सकता है मुझसे कहा जाए

उस अंधेरे में उतरने को

जहाँ से लौटना संभव नहीं

तब मैं तुम्हारे नाम को

एक पुल की तरह पुकारूँगा

मुझे यकीन है किनारा तुम ही बनोगी


और अगर किसी दूसरी दुनिया में

मुझसे मेरा हिसाब माँगा जाएगा

तो तुम मुस्कुरा कर कहना

यह रहा एक इंसान

जिसने प्रेम को

अपना आख़िरी तर्क बनाया।


अमित ‘मौन’


 #amitmaun #amit #maun #love #poem #poetry #hindi #hindipoem #hindipoems 

Saturday, 17 January 2026

प्रेम लौटता है

 प्रेम

कभी सामने से नहीं आता

वह आता है

बिना दस्तक

बिना आहट


जैसे नींद

थकी हुई आँखों में

ख़ुद ही उतर आती है


कभी वह छुपा होता है

मोबाइल की गैलरी में

किसी धुंधली तस्वीर के कोने में


या फिर

पुरानी चैट के बीच

जहाँ आख़िरी संदेश

अब भी “ख़याल रखना” है


प्रेम लौटता है

और आ बैठता है

कुर्सी खिसकाने की आवाज़ पर

या बालों में उँगलियाँ फिराते वक़्त

जब हाथ

अपने आप रुक जाता है


कभी-कभी

वह बन जाता है

एक अधूरा वाक्य

जो बोलते-बोलते

होंठों पर ही रह जाता है


या कोई सवाल

जिसका जवाब

अब ज़रूरी नहीं लगता


प्रेम

किसी पुराने स्वेटर की तरह है

जो अब पहना नहीं जाता

पर फेंका भी नहीं जाता

ठंड अचानक बढ़ जाए

तो वही

सबसे पहले याद आता है


और यूँ

बिना कहे

बिना लौटने का वादा किए


प्रेम

फिर से

मौजूद हो जाता है


अमित ‘मौन’

P.C.: GOOGLE


मनुष्य

अगर मुझे मनुष्य होना सीखना हो तो मैं तुम्हारे मौन से शुरू करूँगा जहाँ करुणा किसी दिखावे की मोहताज नहीं होती। अगर मुझे कोई प्रश्न सताने लगे त...