Saturday, 17 January 2026

प्रेम लौटता है

 प्रेम

कभी सामने से नहीं आता

वह आता है

बिना दस्तक

बिना आहट


जैसे नींद

थकी हुई आँखों में

ख़ुद ही उतर आती है


कभी वह छुपा होता है

मोबाइल की गैलरी में

किसी धुंधली तस्वीर के कोने में


या फिर

पुरानी चैट के बीच

जहाँ आख़िरी संदेश

अब भी “ख़याल रखना” है


प्रेम लौटता है

और आ बैठता है

कुर्सी खिसकाने की आवाज़ पर

या बालों में उँगलियाँ फिराते वक़्त

जब हाथ

अपने आप रुक जाता है


कभी-कभी

वह बन जाता है

एक अधूरा वाक्य

जो बोलते-बोलते

होंठों पर ही रह जाता है


या कोई सवाल

जिसका जवाब

अब ज़रूरी नहीं लगता


प्रेम

किसी पुराने स्वेटर की तरह है

जो अब पहना नहीं जाता

पर फेंका भी नहीं जाता

ठंड अचानक बढ़ जाए

तो वही

सबसे पहले याद आता है


और यूँ

बिना कहे

बिना लौटने का वादा किए


प्रेम

फिर से

मौजूद हो जाता है


अमित ‘मौन’

P.C.: GOOGLE


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प्रेम लौटता है

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