Friday, 8 September 2023

अधूरी कविता

इतना कुछ कह कर भी बहुत कुछ है जो बचा रह जाता है

क्या है जिसको कहकर लगे बस यही था जो कहना था

झगड़े करता हूँ पर शिकायतें बची रह जाती हैं

और कविता है कि हर पंक्ति के बाद अधूरी लगती है


दुनिया ईर्ष्या में सम्मोहित होकर दानव हो गई

पर तुमने हृदय को लक्ष्मण रेखा में सुरक्षित रखा

इन दो आँखों से कोई कितना देख पाता

तुमने क्या देखा कि आँखें बंद कर ली


कुछ खोजना मतलब कुछ खो जाने की चिंता करना है

मैं तुम में खुशियाँ ढूंढ़ता रहा और तुम ख़ुशियों में मुझे

फ़िर ना ही तुम मिली और ना ही ख़ुशियाँ


मेरा जीवन एक कैनवस था

और तुम्हारे हाथों में रंगों की बाल्टियाँ

मुझे प्रेम में फूल होना था

और तुम्हें तितलियों का जीवन जीना था


मेरा वो हर सपना अजीज था जिसमें तुम थी

पर हर नींद को एक सुबह से मिलना था 

अब तुमने जो बताया उससे जीवन जीता हूँ

और तुमने जो सिखाया उससे कविता लिखता हूँ


अब जीवन एक कविता है और कविता में पूरा जीवन...


अमित 'मौन'


PC : Google


8 comments:

  1. बहुत खूबसूरत

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  2. दिल की गहराई से निकले बहुत सुंदर भाव !!

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