Wednesday, 9 October 2019

ये वादा है लौटूँगा

ना होना किसी का, जब किसी का हो लेना
सीखा है तुमसे ही , कैसे किसी का हो लेना
ये वादा है लौटूँगा, फिर मैं अगले जन्म
रखना सिर मेरे काँधे, और खुल के रो लेना

करो ये वादा मुझसे, ख़ुद को ना सज़ा दोगी
पहन के झुमके, पायल, ख़ुद को सजा लोगी
बिखरी जुल्फ़ों को अपनी, बारिश में अबकी धो लेना
रखना सिर मेरे काँधे, और खुल के रो लेना

तकोगी राह मेरी, आँखों में काजल होगा
नैनों से बातें होंगी, दिल भी पागल होगा
बाहों में सिमटना, और ख़ुद को खो देना
रखना सिर मेरे काँधे, और खुल के रो लेना

बातें भी होंगी बेवज़ह, बेवजह झड़पे होंगी
वक़्त आएगा वही, उंगलियाँ सिर पे होंगी
थकी हारी वहीं, गोदी में मेरी सो लेना
रखना सिर मेरे काँधे, और खुल के रो लेना

ये वादा है मैं लौटूँगा, तुम फिर से मेरी हो लेना
रखना सिर मेरे काँधे, और खुल के रो लेना

अमित 'मौन'

Tuesday, 1 October 2019

युद्ध

पृथ्वी पर आधिपत्य स्थापित करने के लिए सदियों से मनुष्य और प्रकृति में युद्ध होता आ रहा है

मनुष्य के हथियार हैं आरी, कुल्हाड़ी और बड़ी बड़ी मशीनें। जबकि प्रकृति के पास हैं बाढ़, तूफ़ान, भूकंप और ज्वालामुखी।

जब प्रकृति सो रही होती है तब मनुष्य बड़ी चालाकी से कुछ हिस्से पर कब्ज़ा कर लेता है और वहाँ घर रूपी तंबू गाड़ देता है।

फिर अचानक प्रकृति की आँखें खुलती है और वो किसी और हिस्से पर हमला कर वहाँ के तंबू उखाड़ देती है।

अभी तक हुए युद्ध में मनुष्य के हिस्से सफलता अधिक आयी है पर फिर भी प्रकृति का पलड़ा भारी है क्योंकि मनुष्य जानता है कि जब वो जागेगी तब बहुत कुछ दोबारा हासिल कर लेगी।

अमित 'मौन'

Sunday, 29 September 2019

नीरस जीवन

कभी कभी ज्यादा ज्ञान अर्जित कर लेने से भी जीवन नीरसता से भर जाता है। जब हमें सब कुछ पता चल जाता है तो उत्सुकता मर जाती है और जीवन का ध्येय ख़त्म हो जाता है।

हम अक़्सर ये कहते हैं कि बाल्यकाल मानव जीवन का सबसे ख़ुशनुमा दौर होता है और हमें अपने अंदर के बच्चे को हमेशा ज़िंदा रखना चाहिए। इसका एक अर्थ ये भी है कि जीवन में उत्सुकता और अज्ञानता (कुछ बातों के लिए) भी बनी रहनी चाहिए।

उत्सुकता बनाए रखने का एक तरीका ये भी है कि हम जीवन मे कुछ न कुछ नया करते रहें या नयी कोशिश करते रहें। हम उन चीजों को करने का प्रयास करें जिसके बारे में हमें नही पता या यूँ कहें जो हमें सीखनी पड़ें।

क्योंकि जब तक हमारे अंदर अज्ञानता की भावना रहेगी तब तक हमारे मस्तिष्क में घमंड नही आएगा और जब तक सीखने की ललक और उत्सुकता रहेगी तब तक जीवन नीरस नही होगा।

नासा और इसरो अभी भी चाँद की सटीक दूरी का अंदाज़ा लगाने के लिए प्रयासरत हैं पर मेरे अंदर का बच्चा कहता है कि चाँद तो हमारे घर के सामने ही है। किसी दिन कोई बड़ी सी चिड़िया आएगी और मुझे अपने पंखों पर बिठाकर चाँद तक ले जाएगी।

अमित 'मौन'

Friday, 27 September 2019

कहना ये था

लाख वादे हज़ार कसमें
यूँ ही फ़ना हुए
शिकायतों की फ़ेहरिश्त लिए
पास रह ना सका
कितना कुछ कहना था
आख़िरी अलविदा से पहले
पर हुआ यूँ कि
मैं तुमसे कुछ कह ना सका

कहना ये था कि
एक दुनिया सजायी थी तेरे संग
भर दिए थे तुमने जिसमें
वादों के गहरे चटक रंग
पर एक स्याह रंग के सिवा
कोई रंग उसमें रह ना सका
और हुआ यूँ कि
मैं तुमसे कुछ कह ना सका

कहना ये था कि चल पड़ो
साथ एक हसीन सफ़र पर
थामे रखूँगा तेरी हथेली
जीवन की हर डगर पर
पर इन तंग राहों में
संग तू रह ना सका
और हुआ यूँ कि
मैं तुमसे कुछ कह ना सका

कहना ये था कि
बांध लेंगे प्रीत की ऐसी डोर
तोड़ पाएगा ना जहां
लगाए कितना भी जोर
पर एक धागा महीन
ये बोझ सह ना सका
और हुआ यूँ कि
मैं तुमसे कुछ कह ना सका
 
कहना ये था कि
संग तेरे हर हाल में रहना था
तेरे संग ही रोना
तेरे संग ही हँसना था
जो बिछड़े हैं अब
तो एक आँसू भी बह ना सका
और हुआ यूँ कि
मैं तुमसे कुछ कह ना सका

था हर सांस तेरे होने का एहसास
ना जी सकूँगा जो टूटी है ये आस
आख़िरी पलों की कश्मकश भी
मैं सह ना सका
और बदकिस्मती ये कि
मैं तुमसे कुछ कह ना सका

मैं तुमसे कुछ कह ना सका...

अमित 'मौन'

Wednesday, 18 September 2019

दूसरा प्यार

जब आप किसी का दूसरा प्यार होते हैं तब आपसे उम्मीदें कम होती हैं और आपका काम ज्यादा।

आपके हिस्से नही आता वो बेइंतहा प्यार जिसकी आप अपने प्रेमी/प्रेमिका से उम्मीद करते हैं। आपकी किसी कोशिश को वो सराहना नही मिल पाती जिसकी वो हकदार थी। आपके हिस्से आती है बस एक मुस्कान जो शायद आपका दिल रखने के लिए होती है, सिर्फ आपका दिल रखने के लिए। क्योंकि जिसका दिल जीतने की आप कोशिश करते हैं उसका दिल कहीं और होता है।

आपकी हर कोशिश की तुलना की जाती है उस व्यक्ति से जिसको शायद आप जानते भी नही हैं। अगर आप की कोशिश बेहतर हुई तो मुस्कान के साथ आपको उम्मीद दी जाती है की आपको दोबारा कोशिश करने का मौका दिया जाएगा। पर अगर आपकी कोशिश में कमी रह गयी तो एक उलाहना मिलती है कि आप उन जैसे नही हैं और हो भी नही सकते इसलिए कोशिश भी मत कीजिए।

आपको एक टूटा हुआ दिल मिलता है और आपको हमेशा उस टूटे दिल की मरम्मत करनी पड़ती है जिसको जोड़ते जोड़ते एक दिन आप भी टूट जाते हैं।

पर क्योंकि आप उनसे प्यार करते हैं तो आप ये सब जानते हुए भी उनके ज़ख्मों को भरने की कोशिश करते करते ख़ुद के लिए एक घाव तैयार करते रहते हैं।

अब ये आपके ऊपर निर्भर करता है कि उस घाव का दर्द आप कितना सह सकते हैं।

अमित 'मौन'

Wednesday, 11 September 2019

आत्ममंथन

किसी इंसान की ज़िंदगी का वह दौर सबसे भयावह होता है जहाँ पूरी दुनिया की भीड़ मिलकर भी उसकी तन्हाई दूर नही कर पाती। उसके चारों ओर हँसते हुए चेहरे उसको रोने के लिए उत्साहित करते हैं। उसके कानों में पड़ने वाली हर आवाज़ को वो ख़ामोश कर देना चाहता है।

वो दौर जब उजाला उसके लिए एक डर लेकर आता है क्योंकि वो अंधेरे को छोड़ना नही चाहता। जब बदलते मौसम भी बदलाव का एहसास नही कराते। जब तारीखें बदलने पर भी कुछ नही बदलता।

वो दौर जब इंसान ख़ुद से सवाल करता है और ख़ुद ही जवाब देता है।

परिस्थिति के उस चक्र को आत्ममंथन की तरह इस्तेमाल करने वाले लोग मानसिक रूप से सबसे अधिक मजबूत इंसान बन जाते हैं।

अमित 'मौन'

Monday, 9 September 2019

क्यों जीवन व्यर्थ गंवाता है

निश्छल और निष्पाप रूप में
जीव  धरा  पर  आता है
आसक्ति और मोह के वश में
जीवन  व्यर्थ  गंवाता  है

ज्ञानी रावण भी क्रोधित हो
पर  स्त्री  हर  लाता  है
तीनों लोक विजय पाकर भी
रण में  मृत हो जाता है
 
नश्वर  है  ये देह  हमारी
कंस  जान  ना  पाता है
युक्ति सारी अपना कर भी
मृत्यु  अंत  में  पाता  है
 
चक्र बदलने को जीवन का
क्या  क्या  तू  अपनाता  है
खेल  ही  सारा  प्रभू  रचे है
प्राणी  जान  ना  पाता  है

काम, क्रोध और लोभी मन
ये  पाप  सभी  करवाता  है
धन, दौलत हो महल अटारी
धरा  यहीं  रह  जाता  है

प्रत्युत्तर में फल कर्मों का
इसी  धरा  पर  पाता  है
जन्म सफल करने का अवसर
यूँ  ही  व्यर्थ  गंवाता  है

मानव जीवन ही पूँजी है
क्यों बुरे कर्म अपनाता है
सत्कर्मों से सुन हे मानव
नाम  अमर  हो  जाता है

अमित 'मौन'

Sunday, 1 September 2019

अग्निपरीक्षा

व्यर्थ बहाता क्यों है मानव
आँसू  भी  एक  मोती  है
जीवन पथ पर अग्निपरीक्षा
सबको  देनी  होती  है

अवतारी भगवान या मानव
सब  हैं   इसका  ग्रास  बने
राजा  हो  या  प्रजा  कोई
सब परिस्थिति के दास बने

पहले लंका फ़िर एक वन में
सीता   बैठी   रोती   है
जीवन पथ पर अग्निपरीक्षा
सबको  देनी  होती   है

त्रेता, द्वापर या हो कलियुग
कोई  ना  बच  पाया  है
सदियों से ये अग्निपरीक्षा
मानव  देता  आया  है

प्रेम सिखाती राधा की
कान्हा से दूरी होती है
जीवन पथ पर अग्निपरीक्षा
सबको  देनी  होती  है

जीवन  है  अनमोल  तेरा
पर क्षणभंगुण ये काया है
दर्द, ख़ुशी या नफ़रत, चाहत
जीवित  देह  की  माया  है
 
पत्नी होकर यशोधरा भी
दूर  बुद्ध  से  होती  है
जीवन पथ पर अग्निपरीक्षा
सबको  देनी  होती  है

वाणी में गुणवत्ता हो बस
संयम से हर काम करो
कर्म ही केवल ईश्वर पूजा
जीवन उसके नाम करो

सुख, दुःख के अनमोल क्षणों में
आँखें  नम  भी  होती  है
जीवन पथ पर अग्निपरीक्षा
सबको  देनी  होती  है

अमित 'मौन'

Wednesday, 28 August 2019

अधूरापन

मैं अक़्सर सुनता हूँ तुम्हारा ये शिकायती लहजा जब तुम मुझे बताती हो कि तुमने बहुत बार प्रेमियों को अपनी प्रेमिकाओं से ये कहते हुए सुना है कि तुम बिन मैं अधूरा हूँ, तुम मिल जाओ तो पूरा हो जाऊँ और तुम ना मिलो तो जी ना पाऊँ। तुम शायद उम्मीद करती होगी मुझसे भी यही सब सुनने की, और तुम्हारी ये उम्मीद वाजिब भी है।

पर मैं तुमसे बस यही कहता रहता हूँ कि ज़िंदगी कट रही थी तुमसे पहले भी और ज़िंदगी कट जाएगी तुम्हारे बाद भी। ये जीने मरने के वादे, ये कभी ना भूलने की कसमें, ये सब जाने क्यों मुझे बेमानी से लगते हैं।

पर ऐसा नही है कि मुझे तुमसे प्यार नही है। अगर प्यार नापने का कोई पैमाना होता है तो मैं तुम्हें यकीन दिलाता हूँ कि उस पैमाने की सबसे ऊँची वाली लकीर तक पहुँचने वालों की फ़ेहरिश्त में तुम्हें मेरा नाम जरूर मिलेगा।

अगर आम प्रचलित भाषा में कहूँ तो मुझे भी तुमसे मिलना है बिछड़ना नही है, मुझे भी तुमसे दूर नही रहना तुम्हारे बहुत करीब रहना है, मुझे भी अकेले रोना नही तुम्हारे साथ हँसना है, मुझे भी तड़प के मरना नही तुम्हारे साथ खुल के जीना है।

मुझे नही पता कि मैं तुम्हारे बिना कैसे और कितना जी पाऊंगा पर इतना बता दूँ कि जब तुमसे पहली बार मिला था, तभी तुम्हारा एक हिस्सा अपने साथ ले आया था। क्योंकि उसके बाद तुम हमेशा के लिए मेरे ज़हन में समा गयी थी। हर वक़्त तुम्हारा ख़्याल, तुमसे पहली बार मिलने की वो ख़ुशी, तुम्हारी आँखें, तुम्हारा चेहरा, तुम्हारी बातें, वो सब हमेशा मेरे साथ ही रहे।

पता नही क्यों ऐसा होता है कि कोई किसी से कुछ वक़्त ना मिले तो अधूरा हो जाता है, बल्कि मुझे तो लगता है तुमसे पहली बार मिलके ही मैं पूरा हो गया और साथ साथ तुमको भी ले आया। यानि की मैं ख़ुद से भी ज्यादा हो गया।

अब मैं जब भी तुमसे मिलता हूँ तो थोड़ा सा और तुम्हें अपने साथ ले आता हूँ। अब मुझे अधूरा होने का कोई लक्षण ख़ुद में दिखायी नही देता।

मैं सोचता हूँ शायद तुम्हारे साथ भी ऐसा होता होगा। शायद तुम भी थोड़ा सा मुझे अपने साथ ले जाती होगी। पर मुझे ये कभी महसूस नही हुआ कि मैं अधूरा हूँ, और शायद तुम्हे भी कुछ ऐसा एहसास नही होता होगा।

मुझे अब भी ऐसा लगता है कि प्रेम होना ही अपने आप में पूरा हो जाना है। जब प्रेम नही था तब तक हम पूर्ण नही थे। अब हमारे साथ प्रेम है तो हम सम्पूर्ण हैं।

इन सभी बातों से परे जो एक बात मैं तुम्हे कहना चाहता हूँ वो ये कि मैं तुम्हारे साथ हूँ या नही, तुम्हारे पास हूँ या नही, मैं कभी भी अधूरा नही रहूँगा। क्योंकि तुम पहले ही मुझमें बस कर मुझे पूरा कर चुकी हो।

या यूँ कहूँ मैं पूरे से भी ज्यादा हो चुका हूँ...

अमित 'मौन'
 

Saturday, 24 August 2019

शब्दों की माला

मैं  चाहूँ  तुझे  ही, ये  कैसे  बताऊँ
जो पढ़ के ना समझे तो कैसे जताऊँ

देखूँ तुझे तो मैं, ख़ुद ही को भूलूँ
यूँ  चेहरे से नज़रें  मैं कैसे हटाऊँ

ना दूरी  कोई, रह गयी  दरमियाँ है
है सूरत बसी दिल में कैसे दिखाऊँ

आँखें  जो  मूंदूँ, तू  ही  सामने हो
मैं ख़्वाबों में अपने तुझे ढूँढ़ लाऊँ

सोहबत की चाहत, बड़ा कोसती है
ये  दूरी  है  दुश्मन  ये  कैसे  मिटाऊँ

ये शब्दों की माला, तुझे करके अर्पण
कविता  में अपनी  मैं तुझको सजाऊँ

अमित 'मौन'

ये वादा है लौटूँगा

ना होना किसी का, जब किसी का हो लेना सीखा है तुमसे ही , कैसे किसी का हो लेना ये वादा है लौटूँगा, फिर मैं अगले जन्म रखना सिर मेरे काँधे, और ख...