Sunday, 19 May 2019

अस्थायी रिश्ते..

अस्थायी रिश्ते:

कुछ रिश्ते गमले में उगी घास की तरह होते हैं...
घास जो अचानक ही पेड़ के आस पास उग आती है उसके चारों ओर एक सुंदर हरियाली छटा बनकर उसकी शोभा बढ़ाती है...
फिर या तो वो ख़ुद ही सूख जाती है या काट दी जाती है....
क्योंकि पौधे को विकास के लिए उस घास को छोड़ना पड़ता है...

इसी तरह आगे बढ़ने के क्रम में हमें कुछ रिश्तों से विदा लेनी पड़ती है...

जिस तरह बार बार घास उस पौधे के आस पास फिर से उगती और सूखती रहती है..ठीक उसी तरह हमारे जीवन में भी लोग आते और जाते रहते हैं...

सफ़र में कई ख़ूबसूरत पड़ाव मिलते हैं जहाँ हम सोचते हैं कि काश यहीं रुक जाएं...पर मंजिल तक पहुंचने के लिए हमें आगे बढ़ना ही पड़ता है....

अमित 'मौन'

Wednesday, 15 May 2019

पैशन और पढ़ाई

आजकल मार्केट में एक नई खेप आयी है मोटिवेशनल स्पीकर्स की जो बच्चों को सिखाते हैं कि आप अपने मार्क्स पर ध्यान मत दीजिए... बिना पढ़े भी बहुत कुछ पाया जा सकता है और इन नंबर्स के खेल से कुछ नही होता...अपना पैशन फॉलो कीजिए... और साथ साथ ये उदाहरण भी देते हैं कि देखिए सचिन कम पढ़ा लिखा है...जुकरबर्ग और बिल गेट्स कॉलेज ड्रॉपआउट हैं और भी बहुत सारे...पर भाई साहब ये मंदीप महिष्मति, गुरिंदम जगाधरी और जय डेढ़ा ये सारे ख़ुद भारी भरकम डिग्रियां लेकर बैठे हुए हैं...

उसके बाद उन्हें सपोर्ट करते हुए आती हैं जोया अख़्तर की फिल्में जहाँ उनका नायक काम धंधा छोड़ कर निकल पड़ते हैं वर्ल्ड टूर पर सैर सपाटे के लिए....

मजे की बात ये है कि जोश में आकर बच्चे भी इन सबको सच मानकर निकल पड़ते हैं अपना पैशन फॉलो करने...वो पैशन जो हर फिल्म के बाद या हर साल बदलता रहता है....ऋतिक रोशन को देख कर सोचते हैं हीरो बन जाएं...अरिजीत को देख कर सिंगर बनना है...रेमो डिसूजा कहते हैं डांसर बन जाओ, ज़ाकिर को देख कर स्टैंडअप कॉमेडियन...धोनी के फैंस को क्रिकेटर बनना है...कुमार विश्वास को सुन कर हर कोई कवि बनने निकल पड़ा है...और ये सभी पैशन पूरा करने के लिए टिकटॉक नामक संस्था एक उचित प्लेटफार्म भी मुहैया करा रही है...

सोशल मीडिया देख कर मेरा पर्सनल सर्वे ये कहता है कि...2030 तक हर दूसरा बच्चा सिंगर, हर तीसरा बच्चा डांसर, हर चौथा बच्चा स्टैंडअप कॉमेडियन और हर पाँचवा बच्चा कवि होगा....

पर क्या आपको पता है या आपने कभी सोचा है कि पढ़ाई लिखाई का क्या महत्व है..जिस पढ़ाई को आप अपने पैशन के मार्ग में बाधा समझते हैं वो कितनी महत्वपूर्ण है....जिन बिल गेट्स और जुकरबर्ग के उदाहरण आपको दिए जाते हैं उन्होंने पढ़ाई पे कितना ध्यान दिया था आपको पता है??..उन्होंने भी बेसिक पढ़ाई पूरी की और कॉलेज तक पहुंचे और हाँ उन्होंने हमारी आपकी तरह सिर्फ हिंदी और गणित में ध्यान नही दिया बल्कि सॉफ्टवेयर डेवलपिंग पे ज्यादा दिमाग लगाया...और फिर सफलता पाई....और आपकी जानकारी के लिए बता दूँ की उनकी ख़ुद की कंपनियां भी IIT और IIM से रिक्रूटमेंट करती है जहाँ पहुँचने के लिए पढ़ाई कितनी जरूरी है वो बताने की जरूरत नही है..

और ऊपर मैंने जिन जिन के नाम लिए हैं ना आपके आइडल के तौर पर उन सभी ने अपनी बेसिक पढ़ाई पूरी की है...

एक बात याद रखिये आप अपना पैशन पढ़ाई के बाद भी और उसके साथ भी पूरा कर सकते हैं और पैशन पूरा करने में असफल रहने पर भी ये पढ़ाई आपको बचा लेगी पर अगर बिना पढ़ाई के आप पैशन पूरा करने जाएंगे और असफल लौटेंगे तो फिर कहीं के नही रहेंगे....

तो आप सब से सिर्फ़ इतना ही कहना है कि आप सब कुछ करें पर अपनी बेसिक एजुकेशन को जरूर पूरा करें और मन से करें...हर कोई टॉप नही आ सकता पर हर किसी के लिए पढ़ना और अच्छे से पढ़ना बहुत जरूरी है..

और हाँ हर कोई स्पेन घूमना चाहता है (जिंदगी ना मिलेगी दोबारा की तरह) मगर उसके लिए पैसे चाहिए होते हैं और उसके लिए सफल होना पड़ता है....

अमित 'मौन'

Monday, 13 May 2019

एक लड़की प्यारी ...

एक लड़की प्यारी  सुंदर परियों  के जैसी
ना जाने क्यों वो बस मुझ पर ही मरती है

मैं टूटा बिखरा  ख़ुद में खोया रहता हूँ
वो उसपे भी मुझको खोने से डरती है

ख़ामोशी  मेरी  बस  वो ही  पढ़ पाती है
फ़िर आँखों से जी भर के बातें करती है

मैं  अक़्सर  ही  देरी  करता  हूँ  आने में
पर बिन शिकवों के राह मेरी वो तकती है

कुछ लोगों ने  तोड़ा  दिल मेरा  टुकड़ों में
और हर हिस्से में बस वो ही अब रहती है

मैं ख़ुद को जब भी तन्हा माना करता हूँ
संसार मेरा  तुम ही हो  मुझसे  कहती है

हर बला मेरी  वो  अपने  सर  लेना चाहे
हर दुआ में अपनी नाम मेरा ही रखती है

अब सांस उसी के दम से आती है मेरी
बन लहू मेरी  रग रग में वो ही बहती है

अमित 'मौन'

Thursday, 2 May 2019

पाकर तुमको ये जाना है मैंने ख़ुद को ढूंढ़ लिया...

प्रेम पथिक बनने की मैंने,
वजह को ऐसे ढूंढ़ लिया
चाँद सितारों से जाकर के,
पता तुम्हारा पूछ लिया

पाकर तुमको ये जाना है-2,
मैंने ख़ुद को ढूंढ़ लिया

पतझड़ के मौसम में जैसे,
पेड़ कोई मुरझाया था
बरखा की बूंदों के जैसा,
प्रिये तुम्हारा साया था
भँवरे ने बगिया में जैसे-2,
फूल कोई हो सूँघ लिया
पाकर तुमको ये जाना है,
मैंने ख़ुद को ढूंढ़ लिया

तू पुरवा के मस्त पवन सी,
मैं झोंका आवारा था
तेरी छुअन से फ़िज़ा ये बदली,
महका उपवन सारा था
किसी शराबी के जैसे फ़िर-2,
मैं मस्ती में झूम लिया
पाकर तुमको ये जाना है,
मैंने ख़ुद को ढूंढ़ लिया

दिन गुजरे जब तेरी याद में,
रातें अक़्सर तन्हा हों
नींदों के भी गलियारे में,
जब पलकों का पहरा हो
ख़्वाबों में तुझसे मिलने को-2,
इन आँखों को मूँद लिया
पाकर तुमको ये जाना है,
मैंने ख़ुद को ढूंढ़ लिया
 
इश्क़ दुहाई दे दे कर दिल,
तुझसे ही मिलना चाहे
तेरे जिस्म की ख़ुशबू पाकर,
रूह मेरी खोना चाहे
बाहों में कस कर पकड़ा फिर-2,
माथा तेरा चूम लिया
पाकर तुमको ये जाना है,
मैंने ख़ुद को ढूंढ़ लिया

प्रेम पथिक बनने की मैंने,
वजह को ऐसे ढूंढ़ लिया
पाकर तुमको ये जाना है,
मैंने ख़ुद को ढूंढ़ लिया

अमित 'मौन'

Saturday, 27 April 2019

कठिन डगर पे चल के ही तू मंज़िलों को पाएगा

जो वक़्त की बिसात पे
तू हौसले बिछाएगा
फ़लक नही है दूर फिर
सितारे तोड़ लाएगा

आँधियों के वेग में
अडिग खड़ा रहा अगर
रुख़ हवाओं का तू फिर
ख़ुद ही मोड़ पाएगा

कदम को कर कठोर तू
ख़ुद को जो जलाएगा
सदमें हर सफ़र के फिर
हँस के झेल जाएगा

निराश हो के रुक नही
हताश हो के थक नही
आशा की पतंग को
स्वयं ही तू उड़ाएगा

पर्वतों को तोड़ के
जो रास्ते बनाएगा
एक दिन ज़माना भी
पीछे पीछे आएगा

निगाह तेरी लक्ष्य पे
तू मुश्किलों से डर नही
कठिन डगर पे चल के ही
तू मंज़िलों को पाएगा

अमित 'मौन'

Monday, 22 April 2019

आदतन रो लेता हूँ अब...

आदतन रो लेता हूँ अब
उदासी  खूब  भाती  है
तन्हाई माशूका है  मेरी
दूर जा जाके लौट आती है

दिल के दरिया से निकल
कोई  नदी  सी  आती है
पलकों के पहरे को तोड़
लहरों  सी  बह जाती है

ख़ामोशियों के साये में
एक आह गुनगुनाती है
चीख़ कर  चुपके से ये
सुकून सा  दे  जाती है

दिन  दुश्मन  हुए  अब
रातें  बड़ा  सताती  हैं
करवटें  बदल  लेता हूँ
जब नींद नही आती है
 
वक़्त  बेवक़्त  ये  यादें
बिछड़ों से मिला लाती हैं
समझाया दिल को बहुत मगर
ये आँखें कहाँ  समझ पाती हैं

अक़्सर रो ही लेता हूँ फिर
जब उदासी गले लगाती है
तन्हाई  माशूका  जो  ठहरी
दूर जा जाके  लौट आती है

दूर जा जाके  लौट आती है

अमित 'मौन'

Friday, 19 April 2019

हर बंद कमरे में कोई कहानी रहती है...

सुबह ने कान में
कुछ कह दिया उधर सूरज से

झाँकने लगी है किरणें
इधर खुली खिड़कियों से

दीवारें चीख रही हैं
शायद कोई किस्सा लिए

बिखरे पड़े हैं कुछ पन्ने
इस वीरान से कमरे में

एक शख़्स दिखा था
यहाँ रात के अंधेरे में

निगल गयी तन्हाई या
बहा ले गए आँसू उसे

शिनाख़्त करते हैं
चलो ये पन्ने समेटते हैं

हादसों के हवाले से
अब ये कहानी पढ़ते हैं

तन्हाई चीख़ चीख़ कर यही बात कहती है
हर बंद कमरे में कोई कहानी रहती है...

अमित 'मौन'

Wednesday, 17 April 2019

हर रात वही किस्सा, मुझमें बाकी है तेरा हिस्सा

तन्हाई के तकिये तले जलती रही
एक आस की लौ

आँसुओं की ओस में भीग रही
दो अधखुली आँखें

पलकों के दरवाजे पर दस्तक
दे रही है नींद

इंतज़ार में अपनी बारी के
थक गया है ख़्वाब

सितारों संग रात की चौकीदारी में
लगा रहा वो चाँद

और फिर हर्फ़ की मद्धम आँच में
पक गयी एक नज़्म

अमित 'मौन'

Tuesday, 2 April 2019

लंक  विध्वंस  किए हनुमाना, रघुराई  अति  किए  बखाना

लंका दहन के पश्चात जब हनुमान जी श्रीराम एवं सुग्रीव जी के पास शिविर में वापस आये तो सभी ने हर्षोल्लास के साथ उनका स्वागत किया एवं उनकी वीरता का बखान करना शुरू कर दिया...श्रीराम जी ने भी उनकी भरपूर प्रशंसा की...

परंतु भक्त हनुमान जी.. जो कि अभी भी इस बात से व्यथित थे कि माता सीता किस हाल में लंका नगरी में अपने दिन काट रहीं हैं और वो चाहकर भी उन्हें वहाँ से लाने में असमर्थ रहे (हालाँकि हनुमान जी ने सीता माता से उनके साथ चलने का आग्रह किया था परंतु माता सीता ने उन्हें ये कहकर मना कर दिया कि अब प्रभू राम स्वयं ही आकर उन्हें यहाँ से ले जाएंगे) वो इतनी प्रशंसा पाकर असहज हो गए तथा उन्होंने बड़ी ही विनम्रता से अपने इस काम का श्रेय प्रभू श्रीराम की कृपा तथा बाकी लोगों (जैसे जामवंत जी, माता सीता एवं विभीषण) को दे दिया....

हनुमान जी के शब्दों को परिकल्पित करके इस रचना के माध्यम से आप सभी तक पहुँचाने का प्रयास किया है...आशा है आप सभी इन भावों से जुड़ पाएंगे......

लंक  विध्वंस  किए हनुमाना
रघुराई  अति  किए  बखाना
तुम्हरी भुजा है शक्ति अपारा
महाबली तुम  जग पहिचाना

लांघ जलधि जो पहुँचे लंका
करेउ  दूर  सीता  की  शंका
कूद  फांद  वाटिका  उजारी
चहुँ  दिशा  में  तुम्हरा डंका

हनुमान उवाच:-

नाथ सकल ये कृपा तुम्हारी
मैं  सेवक  सेवा   ही  प्यारी
आज्ञा पाई सिया सुधि लाऊं
पालन  को  जाऊं  बलिहारी

हुई  मंत्रणा  पार  कोउ  जाए
लांघ जलधि कोउ पता लगाए
कथा दिवाकर बाल्यकाल की
जामवंत  तब  स्मरण  कराए

आपन शक्ति कबहुँ ना जाना
वानर साधारण  सा हनुमाना
धन्यवाद   श्री  जामवंत  का
सेवक की शक्ति को पहिचाना
 
लंका पहुँच हुआ  दुःख भारी
दिखी कहीं ना सीता महतारी
पूर्ण  दिवस  थी  छानी लंका
मन  ही  मन  में  मानी  हारी

कृपा प्रभू अद्भुत दिखलाए
राम नाम की  ध्वनि सुनाए
लंका में सुमिरै नाम तिहारा
भक्त विभीषण प्रभू मिलाए

जो मिलते ना रावण के भ्राता
उस  स्थल  को  ढूंढ़  ना पाता
मिलती कैसे 'अशोक वाटिका'
वियोग में थी जहाँ सीता माता

पहुँच वाटिका काज ये कीन्हा
चूड़ामड़ी  मात   को   दीन्हा
भेंट दिए  प्रभू  स्वयं आप  ही
तुम्हरी कृपा मात मोहि चीन्हा

मात की आज्ञा से फल खाए
सकल असुर तब पाछे आए
मात  कृपा   से  शक्ति   पाई
मारी   लात   धाम   पहुँचाए

सुनी  खबर  रावण  खिसियाया
अक्षय कुमार था युद्ध को आया
आशीष  मात  का  कृपा  ऐसी
मुष्टि  प्रहार  से   प्राण  गंवाया

अति क्रोधित रावण खिसियाना
पठएसि   मेघनाद   बलवाना
तुम्हरी कृपा  समर्पण कीन्हा
शस्त्र वो  नागपाश पहिचाना

कर विमर्श ये लंकापति कीन्हा
दूत समझ मोहे मृत्यु ना दीन्हा
पूँछ  मोरे  फिर  अनल लगाए
प्रतिशोध पुत्र  मृत्यु का लीन्हा
 
वानर  ने  तब  पूँछ बढ़ाई
लंका में  फिर आग लगाई
पूर्ण काज फिर आपन कीन्हा
पूँछ  मोरी की  अनल बुझाई

कृपा आपकी जो कर पाया
लंका से  माता  सुधि लाया
राम नाम  की  महिमा ऐसी
सहयोग सभी का मैंने पाया

अब  विनती  यह  प्रभू  हमारी
रावण  संहार  की  करें  तैयारी
दशरथ नंदन की आस में व्याकुल
राह   तके  हैं   जनक   दुलारी

और इस प्रकार भक्त हनुमान जी ने बड़ी सरलता से सारा श्रेय अपने प्रभू को दे दिया और साथ ही उनसे माता सीता को शीघ्र वापस लाने की विनती की.....

अमित 'मौन'

सुधि- खबर
मंत्रणा- बातचीत
जलधि- सागर
दिवाकर- सूरज
सकल- सभी/सम्पूर्ण
खिसियाना- क्रोधित होना
मुष्टि- मुट्ठी/घूंसा
अनल- अग्नि/आग

Monday, 25 March 2019

मैं प्रेम में हूँ

रेगिस्तान ढक दिए जाएंगे समंदर के पानी से
मछलियाँ साहिल पे गुफा बना कर रहने लगेंगी
तितलियाँ पेड़ों पर अपने घोसलें बना लेंगी
सारे पक्षी मिलकर एक नया शहर बसा लेंगे
नदियाँ पहाड़ों से नीचे आना बंद कर देंगी
जब इंसान सिर्फ़ चाँद पर रहा करेंगे

मैं सूरज से एक घोड़ा माँग लूँगा और तुम्हे लेकर मंगल ग्रह पर चला जाऊंगा....
सच बताऊं तो मंगल बिल्कुल तुम्हारी तरह दिखता है....सुर्ख लाल..

तुम कहती हो ना कि प्रेम में सब संभव है..तो..मेरी बातों पर यकीन करो.....

क्योंकि मैं प्रेम में हूँ...

मेरी आँखों मे झाँक कर अपनी दुनिया देखी है जानां... कभी कोशिश करना..सच कहता हूँ कल्पना कम पड़ जाएगी.....

अमित 'मौन'

अस्थायी रिश्ते..

अस्थायी रिश्ते: कुछ रिश्ते गमले में उगी घास की तरह होते हैं... घास जो अचानक ही पेड़ के आस पास उग आती है उसके चारों ओर एक सुंदर हरियाली छटा ...