अनकहे किस्से
Welcome to my Blog. I write what i saw & learn from life. Because: जो पढ़ा किताबों में, अमल में लाऊं भी तो क्या, ये जिंदगी है जनाब, फलसफ़ों से नही चलती.... Suggestions/appreciations in comment box are always welcomed. You can also read my latest writing at the following link: www.yourquote.in/amitmaun
Saturday, 24 January 2026
Thursday, 22 January 2026
Tuesday, 20 January 2026
Sunday, 18 January 2026
Saturday, 17 January 2026
प्रेम लौटता है
प्रेम
कभी सामने से नहीं आता
वह आता है
बिना दस्तक
बिना आहट
जैसे नींद
थकी हुई आँखों में
ख़ुद ही उतर आती है
कभी वह छुपा होता है
मोबाइल की गैलरी में
किसी धुंधली तस्वीर के कोने में
या फिर
पुरानी चैट के बीच
जहाँ आख़िरी संदेश
अब भी “ख़याल रखना” है
प्रेम लौटता है
और आ बैठता है
कुर्सी खिसकाने की आवाज़ पर
या बालों में उँगलियाँ फिराते वक़्त
जब हाथ
अपने आप रुक जाता है
कभी-कभी
वह बन जाता है
एक अधूरा वाक्य
जो बोलते-बोलते
होंठों पर ही रह जाता है
या कोई सवाल
जिसका जवाब
अब ज़रूरी नहीं लगता
प्रेम
किसी पुराने स्वेटर की तरह है
जो अब पहना नहीं जाता
पर फेंका भी नहीं जाता
ठंड अचानक बढ़ जाए
तो वही
सबसे पहले याद आता है
और यूँ
बिना कहे
बिना लौटने का वादा किए
प्रेम
फिर से
मौजूद हो जाता है
अमित ‘मौन’
Friday, 8 September 2023
अधूरी कविता
इतना कुछ कह कर भी बहुत कुछ है जो बचा रह जाता है
क्या है जिसको कहकर लगे बस यही था जो कहना था
झगड़े करता हूँ पर शिकायतें बची रह जाती हैं
और कविता है कि हर पंक्ति के बाद अधूरी लगती है
दुनिया ईर्ष्या में सम्मोहित होकर दानव हो गई
पर तुमने हृदय को लक्ष्मण रेखा में सुरक्षित रखा
इन दो आँखों से कोई कितना देख पाता
तुमने क्या देखा कि आँखें बंद कर ली
कुछ खोजना मतलब कुछ खो जाने की चिंता करना है
मैं तुम में खुशियाँ ढूंढ़ता रहा और तुम ख़ुशियों में मुझे
फ़िर ना ही तुम मिली और ना ही ख़ुशियाँ
मेरा जीवन एक कैनवस था
और तुम्हारे हाथों में रंगों की बाल्टियाँ
मुझे प्रेम में फूल होना था
और तुम्हें तितलियों का जीवन जीना था
मेरा वो हर सपना अजीज था जिसमें तुम थी
पर हर नींद को एक सुबह से मिलना था
अब तुमने जो बताया उससे जीवन जीता हूँ
और तुमने जो सिखाया उससे कविता लिखता हूँ
अब जीवन एक कविता है और कविता में पूरा जीवन...
अमित 'मौन'
Sunday, 9 July 2023
आख़िरी बार
Saturday, 1 April 2023
जमापूँजी
लम्हों की लड़ी है ये जीवन
और तुम यादों का अनोखा संसार
कुछ तो अलग है तुम्हारी छुअन में
जो लहू को ताजा कर जाता है
कोई दूसरी दुनिया है तुम्हारा साथ
जहाँ हँसने से उजाला होता है
तुम्हारे होने भर से समय रुक जाता है
घड़ियों की चाल बदल सकती हो तुम
जादू कोई कला नहीं एक सोच भर है
मुझे हँसा कर करिश्मों में यकीन बढ़ाती हो
उदासियाँ श्राप से मिलती होंगी
और आशीर्वाद का फल हो तुम
हवाएं मुट्ठी में भर कर साँसें बांटती हो
ईश्वर की भेजी एक चिट्ठी हो तुम
पहचान छुपाता बहुरूपिया हूँ मैं
और जीवन की जमापूँजी बस तुम
अमित 'मौन'
Friday, 17 March 2023
जीवन
क्यों ना सुख दुःख निर्धारित मात्रा में मिले
संघर्ष इतना कि साहस जवाब ना दे
और आराम इतना कि शरीर बोझ ना बने
ज्ञान इतना कि सही गलत में फ़र्क लगे
अज्ञानता इतनी की जीवों में समानता दिखे
मुस्कान ऐसी की मन में कटुता ना रहे
और आँसू ऐसे की आँखों से निश्छलता बहे
सुख इतना कि मन में बस भक्ति जगे
और दुःख इतना कि जीवन श्राप ना लगे।
अमित 'मौन'
Monday, 26 December 2022
अलग दुनिया
तुम थी तो सब कितना आसान लगता था। ये दुनिया तुम्हारे इर्द गिर्द सिमटी हुई थी। समंदर की लहरें तुम्हारी आँखों में हिचकोले मारती और पुतली बने आसमान को भिगोया करती थी। केशों में हवाएं कैद करके तुम उंगलियों से तूफान की दिशा तय करती थी। बारिशें तुम्हारी मुस्कुराहट से मिलने आया करती थीं और पेड़ तुम्हारे लिए हरियाली का तोहफ़ा लाया करते थे। हर रास्ता तुमसे होकर गुजरता और हर सफ़र की मंज़िल तुम थी। मैं अनंत संभावनाओं के उस शिखर पर था जहाँ सब कुछ बस पलकें झपकाने जितना आसान था।
पर अब लगता है मैं किसी और दुनिया में हूँ और ये दुनिया इतनी बड़ी है कि हर रोज जाने कितने लोग एक दूसरे से बिछड़ जाते हैं और फ़िर कभी नही मिल पाते। ख़ुशियों ने रूठकर ख़ुदकुशी कर ली है और पानी बादलों को छोड़कर मेरी आँखों मे बसता है। मैं अनहोनी की आशंकाओं से घिरा हुआ हूँ और वो एक मुमकिन रास्ता ढूँढ़ रहा हूँ जिसकी मंज़िल तुम हो।
मैं दो दुनियाओं के बीच फँसकर सपने और हकीक़त के बीच का फर्क तलाश रहा हूँ और तुम शायद कहीं दूर मेरे इंतज़ार में जीवन के फूलों को मुरझाते हुए देख रही हो।
अमित 'मौन'
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घर के सब बच्चों के साथ पूरी मस्ती में जीते थे मिलता था जब दूध हमे सब नाप नाप के पीते थे स्कूल से वापस आते ही हम खेलने भाग जाते थे खाना जब...
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इतना कुछ कह कर भी बहुत कुछ है जो बचा रह जाता है क्या है जिसको कहकर लगे बस यही था जो कहना था झगड़े करता हूँ पर शिकायतें बची रह जाती हैं और कवि...
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लम्हों की लड़ी है ये जीवन और तुम यादों का अनोखा संसार कुछ तो अलग है तुम्हारी छुअन में जो लहू को ताजा कर जाता है कोई दूसरी दुनिया है तुम्हार...









