Friday, 16 March 2018

आशिक़ की नींद- ashiq ki neend

ना जगाओ नींद से उस आशिक़ को
आज कई दिनों बाद सोया लगता है

कुछ आँखों में  उसकी  नशा  भी है
मय में  खुद  को  डुबोया  लगता है

देखो  गीला है  तकिया भी  उसका
आज तो जी भर के  रोया लगता है

शायद कुछ दर्द कम हुआ है उसका
आज ही जख्मों को धोया लगता है

आज बेफिक्र है जैसे कुछ बाकी नही
इश्क़ में देखो सब कुछ खोया लगता है

4 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, १७ मार्च - भारत के दो नायाब नगीनों की जयंती का दिन“ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    ReplyDelete
  2. बहुत बहुत धन्यवाद sir🙏🙏

    ReplyDelete

मंदबुद्धि

हर रोज परिवर्तित होती इस दुनिया से सामजंस्य बिठाने में असफल रहते हुए मैं हमेशा मंदबुद्धि की श्रेणी में रहा। जब दुनिया के सभी ज्ञानी  ख़ुद को ...