Thursday, 31 October 2019

अधूरी कविता

किसी दिन सहसा ही
एक अंधेरे कमरे में
मौन हो जाएगी
मेरी आवाज
रुक जाएगी मेरी सांसें
मेरी देह परिवर्तित हो जाएगी
एक मृत शरीर में
मेरी आत्मा को
निष्काषित कर दिया जाएगा
इस नश्वर शरीर से

जब देह विलीन हो जाएगी
इसी मिट्टी में
और आत्मा कूच कर जाएगी
अपने लोक की ओर

तब कहीं नही बचूँगा मैं
और नही रहेगा
मेरा कोई निशान

पर मेरा अस्तित्व
बचा रह जाएगा
मेरी कविताओं में
रह जाएगी मेरी प्रेम कविता
जिसे हर प्रेमी सुनाएगा
अपनी प्रेयसी को

सभी देवदास
चीख चीख कर पढ़ेंगे
मेरी विरह की कविता

और हौसला देंगी
मेरी कविताएं
जिनमें जज़्बा होगा
कुछ कर गुजरने का

पर कोई नही पढ़ेगा
मेरी आख़िरी कविता
मेरे सिरहाने पड़ी
मेरी अधूरी कविता

कविता जिसमें
नही होगा कोई रस
कविता जिसमें होगा
मेरा सच

मेरी तरह ही शापित
जन्म लेते ही मार दी जाएगी
मेरे साथ मेरी कविता

अमित 'मौन'

Image Source- Google

8 comments:

  1. अधूरी कविता पूरी करने वाला कोई नहीं होता, उसी जीना होता है, खुद ही पूरी करनी पड़ती है
    बहुत सुन्दर रचना

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    1. जी सही कहा आपने...बहुत बहुत धन्यवाद आपका

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 01 नवम्बर 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. यशोदा जी हार्दिक आभार आपका

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  3. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (०२ -११ -२०१९ ) को "सोच ज़माने की "(चर्चा अंक -३५०७) पर भी होगी
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

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    Replies
    1. अनीता जी हार्दिक आभार आपका

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