Monday, 11 November 2019

दूरियाँ

तुम्हारी गहरी आँखों से टकराना अभी भी मेरी शर्मीली आँखें झेल नही पाती और प्रत्युत्तर में मेरी पलकें झुक कर तुम्हारे विजयी होने का संदेशा देती हैं।

तुम्हारी आवाज़ आज भी मेरे कानों में गुदगुदी करते हुए मेरे मस्तिष्क में प्रवेश करती है और मेरी सोच को तुम्हारे अधीन कर देती है।

तुम्हारा हँसना अब भी मेरे लिए सबसे कारगर दवा का काम करता है जिसे देखने मात्र से ही मेरे सारे दुःख दर्द हवा में काफ़ूर हो जाते हैं।

सुबह सुबह माँ के हाथों से बनी चाय की ख़ुशबू लेते हुए उठने से लेकर रात को चूमते हुए गुड़ नाईट बोलने तक ये फ़ोन मुझे तुमसे मीलों दूर होने का एहसास नही होने देता।

आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस की इस दुनिया में फ़ोन और उसके बाद हुआ इंटरनेट का आविष्कार मानो विज्ञान की सबसे सुंदर उपलब्धि है।

शारीरिक रूप से तुमसे इतनी दूर रहकर भी मानसिक और आत्मिक रूप से मेरा तुमसे जुड़ा रहना हमसे ज़्यादा उस दार्शनिक को सुकून देता है जिसने पहली बार कहा था कि
''प्रेम सभी सीमाओं से परे होता है और प्रेमियों के लिए दूरी कभी बाधा नही बन सकती''।

ना मैं पहला हूँ और ना मैं आख़िरी जिसने दूरियों को कभी प्यार पर हावी नही होने दिया। पर मैं वो खुशनसीब जरूर हूँ जिसे साथी के रूप में तुम मिली और जिसके कारण ये 'Long Distance Relationship' भी 'Closest to my Heart' बना रहा।

अमित 'मौन'


Image credit: Google

1 comment:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (13-11-2019) को      "गठबन्धन की नाव"   (चर्चा अंक- 3518)     पर भी होगी। 
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
     --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

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