Friday, 29 January 2021

रिश्ते

किसी एक इच्छा के पूरी ना होने की उदासी कितनी और चीजों के मिलने की ख़ुशी को निग़ल जाती है। ऐसे ही किसी ख़ास रिश्ते के ख़त्म होने के बाद कोई और रिश्ता बनाने की हिम्मत हम कभी नही जुटा पाते।

यूँ तो रिश्तों की कोई उम्र नही होती। कई बार ये बस कुछ सालों के मेहमान होते हैं और कई बार ताउम्र साथ बने रहते हैं।

कुछ रिश्ते मरहम की तरह होते हैं जो किसी और से मिले घावों को ठीक करने का काम करते हैं तो कुछ रिश्ते हमारे लिए छाँव का काम करते हैं जिनके तले बैठ कर हम अपनी मानसिक थकान दूर करते हैं।

कुछ रिश्ते हमें एक सीमित दायरे में बाँध देते हैं और कुछ रिश्ते ऐसे बन जाते हैं जिनके बाहर हमें कुछ और दिखता ही नही। कुछ को हम चाहते हुए भी नही छोड़ सकते और कुछ ना चाहते हुए भी साथ छोड़ जाते हैं।

हम जन्म लेते ही ख़ुद को ढेरों रिश्तों के बीच घिरा हुआ पाते हैं पर आखिरकार ये निर्णय हमे ख़ुद ही लेना होता है कि मरने से पहले हम किन रिश्तों के साथ जीना चाहते हैं।

जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे होने चाहिए जिनका साथ पाकर हम पूर्ण हो सकें और जिनके ना होने का ख़ालीपन कोई और ना भर सके।

अमित 'मौन'


P.C.: GOOGLE

 

4 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (31-01-2021) को   "कंकड़ देते कष्ट"    (चर्चा अंक- 3963)    पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-    
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    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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  2. बहुत बढ़िया

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