Tuesday, 2 January 2018

Lautkar phir nhi atey kabhi jaane wale

लाख आवाज लगाते रहें बुलाने वाले

लौटकर फिर नहीं आते कभी जाने वाले

एक अरसा गुजर गया इंतज़ार में उनके
खुद को बिसराया था प्यार में जिनके
अब वही रुलाते हैं जो थे कभी हँसाने वाले
लौटकर फिर नहीं आते कभी जाने वाले

सुबह शाम गुजरती थी बाँहों में जिनकी
अब तो बस यादें रहती हैं पास उनकी
जाने कहाँ गये दो दिलों को मिलाने वाले
लौटकर फिर नहीं आते कभी जाने वाले

खिलती थी नाम से जिनके दिल की हर कली
जिनके आने से हमको हर ख़ुशी थी मिली
जाने कहाँ गए मोहब्बत की लौ जलाने वाले
लौटकर फिर नहीं आते कभी जाने वाले

सारी उम्र साथ रहने का वादा था किया
कुछ दिनों का साथ फिर मुंह मोड़ लिया
तोड़ देते है सपने वही जो थे दिखाने वाले
लौटकर फिर नहीं आते कभी जाने वाले

लाख आवाज़ लगाते रहें बुलाने वाले
लौटकर फिर नहीं आते कभी जाने वाले

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