Sunday, 11 March 2018

तो क्या हो गया- to kya ho gaya

हाँ मचला था कुछ  पल को  दिल फिर सो  गया
आज उससे फिर मिल भी लिये तो क्या हो गया

मोहब्बत की राहों में  हर किसी को भटकना  है
सामना उनसे अगर हो भी गया तो क्या हो गया

माना  की  ज़ख्म  अभी अभी  तो भरा  था  मेरा
उसके मिलने से हरा हो भी गया तो क्या हो गया

सच है की उसे भुलाने को वो गलियां छोड़ आया
उसने भी इसी शहर  घर बनाया  तो क्या हो गया
 
बस  अभी  तो मुस्कुराना  शुरू ही किया था मैंने
फिर इन आँखों में  आंसू आया  तो  क्या हो गया

कुछ  मुझे  भी  अब  उजाले  रास  आने  लगे  थे
'मौन'  फिर  अंधेरो  में  बिठाया  तो  क्या हो गया

10 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, घमण्ड विद्वत्ता को नष्ट कर देता है“ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. लाजवाब ग़ज़ल ... हर शेर कमाल का ...

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  3. आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 14फरवरी 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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