Tuesday, 24 April 2018

यूँ खुद तो गम मेरे दरवाजे नही आया होगा

यूँ  खुद तो गम  मेरे दरवाजे नही आया होगा
जरूर किसी अपने ने पता मेरा बताया होगा

चेहरे पे नमी सी  जो मालूम पड़ती है  आज
कल रात वो शख़्स आंसुओं में  नहाया होगा

बूँदे लहू की  इन जख़्मों पे  रिसती नही अब
कोई भंवरा तो इनके इर्द गिर्द मंडराया होगा

खंजर के निशां  जिस्म पे  दिखने लगे हैं  अब
कोई इतने करीब दिल की राहों से आया होगा

अब खामोशियाँ गूँजा करती हैं इस सन्नाटे में
'मौन' होने से पहले वो जरूर चिल्लाया होगा

2 comments:

  1. वाआअह क्या खूब कहा!

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