Monday, 11 June 2018

बेचैनी...

आधी रात का समय था अचानक रवि की आँख खुल गयी, पास में पड़े मोबाइल को उठाया और देखा तो रात के 12.30 हो रहे थे.

वो क्या था आज रवि दफ़्तर से घर जल्दी आ गया था और खाना भी जल्दी खा लिया था, आज कुछ ज्यादा थक गया था तो बिस्तर पे जाते ही नींद आ गयी थी.

खैर अब आँख खुल ही गयी थी तो उसने अपना हाथ बिस्तर पे यहाँ वहाँ घुमाया उसका हाथ शायद बिस्तर पे किसी को ढूंढ़ रहा था पर अँधेरा होने की वजह से कुछ दिख नही रहा था, वो झट से उठा और लाइट ऑन की.

उजाला होते ही वो चौंक गया उसकी आँखें खुली रह गयी वो हैरान था बिस्तर पे कोई नही था! ये क्या वो तो हमेशा साथ रहती थी रात में कभी भी उठो वो वहीँ बगल में रहती थी पर आज क्या हुआ वो नही थी.

वो घबरा गया, झट कमरे से बाहर आया और उसे बरामदे में खोजने लगा पर वो नही दिखी, हालाँकि बाथरूम का दरवाजा खुला था और अंदर कोई नही था फिर भी तसल्ली करने को वहाँ झाँका पर कोई होता तो दिखता ना..

रवि और ज्यादा घबरा गया पसीना उसके चेहरे से होता हुआ गले और नीचे तक जाने लगा था, वो भागा हुआ छत पे गया पर वो वहां भी नही दिखी अब रवि को अजीब सी घबराहट हो रही थी उसे समझ नही आ रहा था कि क्या करे..

उसने कुछ और सोचा और फिर मेन गेट खोल के बाहर देखा, स्याह काली रात थी पूरी गली सुनसान थी, गली के एक दो आवारा कुत्ते दिख रहे थे जो उस इकलौती स्ट्रीट लाइट के नीचे जीभ लटका के बैठे हुए थे शायद वही थे जो जाग रहे थे बाकी सभी नींद की गिरफ़्त में कैद अपने अपने घरों में सो रहे थे..

रवि कुछ सोचते हुए बाहर निकला और चलता चलता काफी दूर तक गया पर कोई नही दिखा वो किसी से कुछ पूछता भी कैसे ? गुप्ता जी की दुकान जो देर रात तक खुली रहती थी वो भी बंद हो गयी थी, दूर दूर तक कोई नही दिख रहा था.

रवि की बेचैनी बढ़ती जा रही थी.. उसने कुछ सोचा और फिर सीधा मेन रोड की तरफ भागा.. शायद वहां मिल जाये.. अब वो मेन रोड पे खड़ा था उसकी साँसें फूल रही थी.. पर अब किस तरफ जाये कहाँ ढूंढ़े उसे?

उसे दूर कुछ लोग खड़े दिखाई दिये, वो चलता गया उनके पास पहुँचा,  कुछ पूछा पर किसी ने कुछ नही बताया वो और आगे बढ़ा, फुटपाथ पर कुछ लोग सो रहे थे पर उनमे से एक जाग रहा था रवि ने उससे भी पूछा पर उसने भी ना में गर्दन हिला दी..

रवि का सब्र उसका साथ छोड़ता जा रहा था वो चीखना चाहता था पर किसी तरह खुद पे काबू पाया और आगे बढ़ा, वो सोच ही रहा था कि अब क्या करे, कहाँ जाये, तभी सड़क के दूसरी ओर उसे एक चाय की दुकान दिखी, उसके कदम तेज़ी से उस चाय की दुकान की तरफ बढ़ चले...

वो चाय वाला यूँ तो बैठा हुआ था पर काफी देर से खाली बैठने के कारण उसे भी नींद की झपकियां आने लगी थी, रवि को देखकर उसे लगा शायद कोई ग्राहक आया और बोला जी कहिये, रवि ने उससे कुछ पूछा और ये क्या .... चाय वाले ने हाँ में सर हिलाया.. रवि की आँखों में एक चमक आ गयी. वो उछल पड़ा उसकी खुशी का कोई ठिकाना ना रहा...जैसे उसके हाथ कोई खज़ाना लग गया हो...आखिर वो मिल जो गयी थी...
 
इतना परेशान होने के बाद रवि ने निर्णय लिया की आज के बाद से वो दो डिब्बी सिगरेट अपने पास रखेगा ताकि उसे इतना बेचैन और परेशान ना होना पड़े और फिर रवि ने सिगरेट जलायी धुँआ उड़ाया और घर जाकर सो गया आखिर अगली सुबह उसे दफ्तर भी जाना था...

Disclaimer:-
Smoking is injurious to health

2 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, एक भयानक त्रासदी की २१ वीं बरसी “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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