Friday, 31 May 2019

विडंबना

विडंबना:

एक इंसान के लिए सबसे ज़्यादा मुश्किल काम है उदासी में किसी अपने के ''क्या हुआ ??'' पूछने पर ''कुछ नही'' वाला जवाब देना...

वो भी उस पल में जब आपका दिल सीने से निकल कर आपकी सांसों को आज़ाद कर देना चाहता हो..
आँखें हर बाँध तोड़कर बह जाना चाहती हों..
पैरों में खड़े होने भर की ताकत भी ना बची हो..
और बाजुएं किसी के कंधे से लिपट कर आपके होंठों से ये कहलवाना चाहती हों कि..

सुनो...मैं ठीक नही हूँ....

और इस दुनिया की सबसे बड़ी विडंबना है कि आपका वो अपना जो आपके इस हाल को जानने के बाद भी आपके ''मैं ठीक हूँ'' वाली बात पर आपको ये एहसास दिलाए की उसने मान लिया है कि 'आप ठीक हैं''.......

अमित 'मौन'

8 comments:


  1. जी नमस्ते,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (03-06-2019) को

    " नौतपा का प्रहार " (चर्चा अंक- 3355)
    पर भी होगी।

    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।

    आप भी सादर आमंत्रित है


    अनीता सैनी

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  2. सुंदर प्रस्तुति

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  3. कहो उसी से जो कहे न किसी से, मांगो उसी से जो दे दे ख़ुशी से..और ऐसा तो एक वही है..उससे दोस्ती बनाकर रखनी चाहिए

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    1. जी बिल्कुल सही कहा आपने...धन्यवाद आपका

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  4. बहुत ही गहरा विवेचन सटीक और सत्य ।

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका

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तेरी याद में डूबा हूँ पर ग़म के प्याले नही भरूँगा सुन लूँगा इस जग के ताने नाम तेरा मैं कभी ना लूँगा बढ़ जाऊंगा तन्हा ही अब राह तुम्हारी न...