Saturday, 12 September 2020

इंतज़ार

कभी कभी लगता है कि अब आगे बढ़ जाना चाहिए। अब यहाँ रुकने का कोई औचित्य नही है। ऐसा कुछ नही है जिसके लिए रुका जाए। मैं गठरी बाँध कर आगे बढ़ने ही वाला होता हूँ कि एक ख़्याल आता है जो कहता है कि अगर तुम वापस आयी और मैं यहाँ ना मिला तो क्या होगा, तुम क्या सोचोगी, कहीं तुम मुझे गलत तो नही समझोगी। कहीं तुम ये ना सोचो कि मैंने इंतज़ार ही नही किया।


सिर्फ़ इतनी सी बात सोचकर मेरे कदम आगे बढ़ ही नही पाते। मेरी आत्मा मेरे शरीर से निकल कर वहीं बैठ जाती है। मेरा शरीर चाह कर भी आगे नही जा पाता। मैं जानता हूँ की इंतज़ार की एक अवधि होती है। एक तय समय के बाद किया गया इंतज़ार पहले निराशा और फ़िर अवसाद में बदल जाता है।

मैं सब समझता हूँ पर फ़िर भी सोचता हूँ कि मेरे इंतज़ार की समय सीमा कौन निर्धारित करेगा? कम से कम इतना हक़ तो मैं अपने पास रख ही सकता हूँ। यही सोचकर मैं हर बार इस अवधि को बढ़ाता चला जाता हूँ। मैं जानता हूँ कि अवधि बढ़ाने के बाद भी एक दिन ऐसा आएगा जब मुझे ही बढ़ना पड़ेगा पर मैं फ़िर से तुम्हारे बारे में सोच लेता हूँ।

मैं जीवन के उस मोड़ पर खड़ा हूँ जहाँ मेरी सोचने की शक्ति, मेरे समझने की क्षमता पर हावी हो चुकी है। मैं कितना कुछ सोच रहा हूँ पर समझने को तैयार नही हूँ।

अमित 'मौन'

9 comments:

  1. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा सोमवार (14 सितंबर 2020) को '14 सितंबर यानी हिंदी-दिवस' (चर्चा अंक 3824) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्त्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाए।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    --
    -रवीन्द्र सिंह यादव


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  2. शुभकामनाएं हिन्दी दिवस की।

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  3. सुन्दर रचना

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  4. बहुत सुन्दर।
    हिन्दी दिवस की अशेष शुभकामनाएँ।

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  5. बहुत सुंदर प्रस्तुति।
    हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  6. बहुत सुन्दर।

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  7. *एक हकीकत*
    इसलिए *हिंदी* नायाब है
    छू लो तो *चरण*
    अड़ा दो तो *टांग*
    धँस जाए तो *पैर*
    फिसल जाए तो *पाँव*
    आगे बढ़ाना हो तो *कदम*
    राह में चिह्न छोड़े तो *पद*
    प्रभु के हों तो *पाद*
    बाप की हो तो *लात*
    गधे की पड़े तो *दुलत्ती*
    घुंघरू बाँध दो तो *पग*
    खाने के लिए *टंगड़ी*
    खेलने के लिए *लंगड़ी*

    अंग्रेजी में सिर्फ- LEG *🌹🌹हिन्दी दिवस की बधाई🌹🌹*

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  8. इंतज़ार की एक अवधि... कभी कभी यह अवध‍ि ही बनकर रह जाती है अम‍ित जी,और वहां सोचना समझना बन जाता है... एक बड़ा सा शून्य

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  9. जी बहुत बढ़िया। इंतज़ार का क्षण बिल्कुल ऐसा ही होता है। यह लेख कई सवालों का जवाब दे रही है।

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तिल

मुझे शुरू से ही ख़ामोशियों से बड़ा लगाव था और तुम्हें चुप्पियों से सख़्त नफ़रत थी। हमारे बीच हर बार हुई घंटों लंबी बातचीत में सबसे ज्यादा योगदान...