Monday, 2 April 2018

स्वतंत्र भारत के पूज्यनीय नेता जी

हाथ में फावड़ा उठा के वो खेतों में पहुँच जाते हैं
सहानुभूति जताने को गरीब के घर खाना खाते हैं

वो बड़ी बड़ी बातें करते हैं विज्ञान के विकास की
सर्दी जुकाम का इलाज़ कराने विदेश चले जाते हैं

उनके हिसाब से शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी तरक्की हुई
मगर अपने बच्चे को सिर्फ ऑक्सफ़ोर्ड में पढ़ाते हैं

ईमानदारी से आयकर भरने की अपील करने वाले
ये खुद अपना पैसा विदेशी बैंक खातों में छुपाते हैं

हिंदुस्तान तो एक धर्म निरपेक्ष देश है सबके लिये
मगर चुनाव से पहले जातिगत सर्वेक्षण करवाते हैं

जनता से मिलने को समय का अभाव है इनके पास
शायद इसीलिये हर सत्र में ये संसद भंग करवाते हैं

कहने को सबके आदर्श सिर्फ महात्मा गांधी यहाँ
पर अब गाली गलौज के साथ ये हाथ भी उठाते हैं

जिनको रोजगार मुहैया कराया है वो एहसान मंद हैं
बेचारे झंडा उठाके इनकी रैलियों की शोभा बढ़ाते हैं

खादी भले ना हो पर कुर्ता और कमीज सफेद ही है
बातों में अपनापन जता ये सभी को टोपी पहनाते हैं

वादों को भूल जायें भले पर त्यौहार नही भूला करते
ईद और दिवाली पे मुबारकबाद के पोस्टर छपवाते हैं

कुसूर इनका नही जादू इनके लुभावने भाषण का है
परेशान होकर भी इनके निशान पे ही ऊँगली दबाते हैं

बाकी जनता है सब जानती है....
गिरगिट और इंसान का फर्क पहचानती है..
        

6 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन न्यायालय के विरोध की राजनीति : ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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    1. जी बहुत बहुत शुक्रिया आपका🙏

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  2. यथास्थिति को उकेरती अछि रचना।
    साधुवाद आपको।

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  3. सब कुछ जानते-समझते हुए भी इनके मकड़जाल में फंस ही जाती है, पब्लिक

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    1. जी बिल्कुल सही कहा आपने👍

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