Tuesday, 10 April 2018

उस रोज हम खुशनसीब होते हैं

उस रोज  हम  खुशनसीब  होते हैं
जिस रोज वो हमारे करीब होते हैं

अहबाब हैं  बहुत  जिंदगी में मेरी
उन सबमें ख़ास वो हबीब होते हैं

जब वक़्त गुजारूं सोहबत में उनकी
सब यार भी  मेरे तब  रक़ीब होते हैं

मेरी हर दौलत उनके  होने से ही है
वो ना हों तो फिर हम गरीब होते हैं

बस पढता हूँ  उनकी  हर अदाओं को
उनसे दूर होकर ही हम अदीब होते हैं

रहता हूँ बस 'मौन' उनके ना होने पे
उनके बिन हर  लम्हे अजीब होते हैं

2 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन कुन्दन लाल सहगल और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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    1. जी हार्दिक आभार आपका🙏

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तुम और चाय...भाग-2

पिछला भाग पढ़ने के लिये इस लिंक पर: https://poetmishraji.blogspot.com/2018/03/blog-post_24.html  सुनी मैंने तुम्हारी चाय और वो बातें.....