Friday, 19 April 2019

हर बंद कमरे में कोई कहानी रहती है...

सुबह ने कान में
कुछ कह दिया उधर सूरज से

झाँकने लगी है किरणें
इधर खुली खिड़कियों से

दीवारें चीख रही हैं
शायद कोई किस्सा लिए

बिखरे पड़े हैं कुछ पन्ने
इस वीरान से कमरे में

एक शख़्स दिखा था
यहाँ रात के अंधेरे में

निगल गयी तन्हाई या
बहा ले गए आँसू उसे

शिनाख़्त करते हैं
चलो ये पन्ने समेटते हैं

हादसों के हवाले से
अब ये कहानी पढ़ते हैं

तन्हाई चीख़ चीख़ कर यही बात कहती है
हर बंद कमरे में कोई कहानी रहती है...

अमित 'मौन'

8 comments:

  1. यकीनन, बन्द कमरे में कहानी रहती है

    बहुत सुंदर

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  2. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (21-04-2019)"सज गई अमराईंयां" (चर्चा अंक-3312) को पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    - अनीता सैनी

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  3. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन सूरदास जयंती और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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    Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद आपका

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  4. बहुत बढ़िया

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