Monday, 9 November 2020

कहो कवि अब क्या लिखोगे??

तुमने भूख लिखी

किसी भूखे ने नही पढ़ी
भूखे को रोटी चाहिए कविता नही
कहो रोटी दे सकते हो क्या?

तुमने बेरोजगारी लिखी
वो किसी काम की नही
आदमी को काम और पैसे चाहिए
काग़ज पर छपी कविता नही
कहो काम दे सकते हो क्या?

तुमने व्यंग्य लिखा
पर किसी को हँसी नही आई
सुधार हँसी ठिठोली से नही आते
मिल कर कदम बढ़ाने पड़ते हैं
कहो बदलाव ला सकते हो क्या?

तुमने दर्द लिखा
पर किसी के मन को नही छुआ
सबका दिल दर्द से भरा निकला
यहाँ सबका ज़ख्म हरा निकला
कहो इलाज कर सकते हो क्या?

अच्छा सुनो
लिख सकते हो तो समाधान लिखो
क्योंकि समस्याएं बहुत हैं

लिख सकते हो तो जवाब लिखो
क्योंकि सवाल बहुत हैं

कहो लिख पाओगे क्या??


अमित 'मौन'


P.C. : GOOGLE


19 comments:

  1. सादर नमस्कार ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (१०-११-२०२०) को "आज नया एक गीत लिखूं"(चर्चा अंक- 3881) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    कामिनी सिन्हा

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  2. बहुत सुंदर

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  3. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।

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  4. वाहः
    लिख सकते हो तो समाधान लिखो
    क्योंकि समस्याएं बहुत हैं

    लिख सकते हो तो जवाब लिखो
    क्योंकि सवाल बहुत हैं

    शानदार लेखन

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  5. पहली बार किसी ने कवि से सटीक बात कही है - लिख सकते हो तो समाधान लिखो। वाह! बहुत अच्छा लगा पढ़ कर। हम हमेशा बुद्धिजीवी कवियों से यह कहना चाहते हैं, आपने कितने सटीक शब्दों में कह दिया।

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    1. हार्दिक धन्यवाद आपका

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  6. हार्दिक आभार आपका

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  7. बेहद शुक्रिया आपका

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  8. यही कटु सत्य है। समस्याओं पर लिख देने से समस्याएँ खत्म नहीं होती हैं। काम करना पड़ता है।

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    1. जी सही कहा आपने... धन्यवाद

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