Friday, 19 July 2019

तुम्हें लिखूँगा बस कविता में

तेरी याद में डूबा हूँ पर
ग़म के प्याले नही भरूँगा
सुन लूँगा इस जग के ताने
नाम तेरा मैं कभी ना लूँगा

बढ़ जाऊंगा तन्हा ही अब
राह तुम्हारी नहीं तकूँगा
यादों की जलती चिंगारी
सिरहाने अब नही रखूँगा

रो लूँगा काली रातों में
आँसू भी गिरने ना दूँगा
तोहफ़े सारे सभी निशानी
आँखों से ओझल कर दूँगा

पढ़ लूँगा मैं उतरे चेहरे
प्रेम कहानी नही पढूँगा
खो दूँगा मैं जो भी पाया
पर क़िस्मत से नही लड़ूंगा

सह लूँगा ये ग़म-ए-जुदाई
पर होंठों पे 'मौन' रखूँगा
तुम्हें लिखूंगा बस कविता में
हर पन्ने पर साथ रहूँगा

अमित 'मौन'

10 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शनिवार 20 जुलाई 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (21 -07-2019) को "अहसासों की पगडंडी " (चर्चा अंक- 3403) पर भी होगी।

    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

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  3. Replies
    1. बेहद शुक्रिया आपका

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  4. बहुत सुंदर सृजन।

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    Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद आपका

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